समाज में धर्म, मानवता और सामाजिक सौहार्द जैसे विषयों पर गंभीर चिंतन प्रस्तुत करने वाली पुस्तक “धर्म: आपको धर्म प्यारा है या जान?” का प्रकाशन किया गया है। इस विचारोत्तेजक पुस्तक के लेखक विशाल लक्ष्मण गड्डेवार हैं, जो महाराष्ट्र के धर्माबाद (नांदेड़) से संबंध रखते हैं।
यह पुस्तक एक काल्पनिक कथा के माध्यम से पाठकों को धर्म के वास्तविक उद्देश्य पर विचार करने के लिए प्रेरित करती है। लेखक ने दिखाया है कि धर्म की स्थापना मनुष्यों को जोड़ने के लिए हुई थी, किंतु आज अनेक परिस्थितियों में वही धर्म विभाजन और संघर्ष का कारण बनता दिखाई देता है। पुस्तक का मूल संदेश मानवता, सह-अस्तित्व और आपसी सम्मान को सर्वोच्च धर्म मानने की प्रेरणा देता है।
कहानी में भारतनगर नामक नगर की घटनाओं के माध्यम से धार्मिक कट्टरता, सामाजिक तनाव, राजनीति और मानवीय मूल्यों के बीच संघर्ष को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया है। लेखक पाठकों के सामने एक महत्वपूर्ण प्रश्न रखते हैं—जब जीवन और धर्म में से किसी एक को चुनने की स्थिति आए, तो वास्तव में अधिक मूल्यवान क्या है?
पुस्तक की विशेषता इसकी सरल भाषा, संवादप्रधान शैली और समाज को सकारात्मक दिशा देने वाला संदेश है। यह केवल एक कहानी नहीं, बल्कि आत्ममंथन का अवसर प्रदान करने वाली रचना है, जो पाठकों को धर्म की बाहरी पहचान से आगे बढ़कर मानवता के सार को समझने के लिए प्रेरित करती है।
यह कृति उन पाठकों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जो समाज, धर्म, राजनीति और मानवीय मूल्यों के संबंधों को गहराई से समझना चाहते हैं। अपने सार्थक संदेश और विचारोत्तेजक कथानक के कारण “धर्म” समकालीन हिंदी साहित्य में एक महत्वपूर्ण योगदान के रूप में उभरती है।