कविता केवल शब्दों का विन्यास नहीं—वह मन की धड़कन, आत्मा की भाषा और अनकहे भावों की दस्तावेज़ होती है। अमित कोहली का नवीनतम कविता-संग्रह अक्स इसी संवेदना का विस्तार है। यह संग्रह प्रेम, विरह, प्रश्न और शून्य—इन सबकी उस यात्रा को दर्ज करता है, जिसे हर व्यक्ति अपने भीतर जीता है, पर अक्सर शब्दों में बाँध नहीं पाता। अक्स केवल कविताओं का संग्रह नहीं, यह मन की उन तहों का आईना है जहाँ भावनाएँ जमती हैं, पिघलती हैं, और कभी-कभी अपनी ही परछाइयों से संवाद करती हैं। पुस्तक की कविताएँ प्रेम को केवल एक सहज, सुखद अनुभूति के रूप में नहीं, बल्कि उसके समूचे विस्तार में प्रस्तुत करती हैं—उस प्रेम में जो अधूरा रह गया, उस चाहत में जो कभी पूरी न हो सकी, उस मौन में जो शब्दों से कहीं अधिक बोलता है। इन कविताओं में अध्यात्म भी है, पर वह किसी गुरु-ग्रंथों या दार्शनिक व्याख्याओं से उपजा हुआ अध्यात्म नहीं। यह वह अध्यात्म है जो जीवन की ठोकरों से जन्मा है—जहाँ हर अनुभव एक प्रश्न बनकर उभरता है:
“क्या प्रेम को समझना पड़ता है या उसे केवल अनुभव करना चाहिए?”
और जब उत्तर खोजा जाता है, तो अक्सर केवल शून्य की शांति मिलती है।
कोहली की कविताओं की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे किसी एक व्यक्ति के लिए नहीं लिखी गईं—फिर भी हर पाठक उनमें अपना ‘अक्स’ देख सकता है। यह संग्रह उन लोगों के लिए है जिन्होंने कभी प्रेम किया है, खोया है, और फिर भी भीतर से प्रेम करने की क्षमता को बचाकर रखा है। यह उन पाठकों के लिए है जिन्होंने जीवन के रास्तों पर चलते हुए कभी खुद को सवालों, भावनाओं और चुप्पियों के बीच अकेला पाया है।
लेखक परिचय: अमित कोहली
अमित कोहली अपने परिचय को किसी उपलब्धि या पदनाम से नहीं बाँधते। वे स्वयं कहते हैं—
“भटकना मुझे भाता है—चाहे आप इसे दिशाहीन कहें, मुझे कोई आपत्ति नहीं।”
उनके लिए रास्ते सिर्फ़ दूरी तय करने का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन से संवाद करने का अवसर हैं। वर्षों तक किताबों ने उनका साथ निभाया—कहानियाँ कानों में फुसफुसाती रहीं, पन्ने दोस्त बनकर बदलते रहे। पर धीरे-धीरे शब्दों के बीच की खामोशी ने अपना असर दिखाना शुरू किया। यही खामोशी कविताओं में ढलकर अक्स बन गई। संगीत उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा है। काम करते समय, यात्राओं में, या किसी शांत दोपहर में—संगीत उनके साथ बहता रहता है। हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत की गहराई, सूफ़ी संगीत की आत्मीयता और कभी-कभी बिथोवन व मोज़ार्ट की अनायास मौजूदगी—ये सब उनके भीतर की कविताओं को आकार देते हैं। अमित कैमरे की आँख से भी दुनिया को देखते हैं—प्रकाश और छाया के खेल में क्षणों को पकड़ लेना उन्हें आनंद देता है। शब्द, धुन और दृश्य—ये तीनों उनके रचनात्मक संसार के स्तंभ हैं। पिछले दो दशकों से वे स्कूली शिक्षा, शिक्षक विकास और सामाजिक–सामुदायिक प्रयासों से जुड़े रहे हैं। लोगों के बीच रहने, उनकी कहानियाँ सुनने और जीवन के अंदरूनी संघर्षों को महसूस करने से उनकी सोच और लेखन दोनों पर गहरा प्रभाव पड़ा है। अक्स उन सभी पाठकों के लिए है जो प्रेम को केवल करना नहीं, जीना चाहते हैं। जो अपनी भावनाओं से भागते नहीं, बल्कि उन्हें समझने का साहस रखते हैं। यह संग्रह मन का आईना है—जहाँ शायद आप अपनी ही परछाईं देख लें।