पुस्तक का नाम: गीतायन (Geetayan)
लेखक: हितेश जोशी
शैली (Genre): दर्शन (Philosophy)
प्रकाशक: Inksight Publishers
आधुनिक जीवन में आध्यात्मिकता का नया स्वर—पुस्तक ‘गीतायन’ का विमोचन
आज जब मनुष्य अपने ही भीतर उठते प्रश्नों, उलझनों, अस्थिरताओं और मानसिक संघर्षों से जूझ रहा है, ऐसे समय में लेखक हितेश कुमार जोशी की नई पुस्तक “गीतायन” आधुनिक युग के लिए एक आवश्यक आध्यात्मिक companion बनकर सामने आई है। यह पुस्तक पाठक को किसी मत, किसी सिद्धांत या किसी धर्म की ओर नहीं ले जाती—बल्कि उसके भीतर के मौन, भीतर के प्रकाश और भीतर के कृष्ण से मिलवाती है।
‘गीतायन’ कोई धार्मिक ग्रंथ नहीं, न ही उपदेशों का संग्रह। यह एक आत्मयात्रा (Journey Within) है—जहाँ शब्द साधना बन जाते हैं और मौन उत्तर।
लेखक अत्यंत सरल, संवेदनशील और सहज भाषा में पाठकों को उस बिंदु तक ले जाते हैं जहाँ धर्म दर्शन बन जाता है, और दर्शन जीवन। यह पुस्तक भगवद्गीता की आत्मा को आधुनिक मन की भाषा में प्रस्तुत करती है, जहाँ शास्त्र और वर्तमान जीवन एक-दूसरे से संवाद करते हुए दिखते हैं।
पुस्तक की मूल अवधारणा—‘भीतर उतरने का आमंत्रण’
गीतायन का प्रमुख संदेश स्पष्ट और गहरा है—
“जीवन के उत्तर बाहर नहीं, भीतर मिलते हैं।”
पुस्तक बताती है कि जीवन कोई युद्ध नहीं; यह एक साधना है। यहाँ हर अनुभव, हर चुनौती, हर पीड़ा और हर उपलब्धि भीतर छिपे सत्य की ओर ले जाने वाले संकेत हैं।
लेखक कहते हैं—
“गीतायन कोई ग्रंथ नहीं, वह प्रकाश है—जो भीतर से बोलता है।”
मुख्य विषयों में शामिल हैं—
- नई शुरुआत का रहस्य
- स्वयं पर विश्वास
- संकट में अवसर
- वर्तमान की शक्ति
- चयन की जागरूकता
- त्याग का अर्थ
- मौन की साधना
- प्रेम का स्वरूप
- यज्ञ और योग का गूढ़ रहस्य
- समर्पण का सौंदर्य
- गीता के शाश्वत सत्य की आधुनिक व्याख्या
प्रत्येक अध्याय पाठक को यह अनुभव कराता है कि आध्यात्मिकता कोई अलग साधना नहीं—वह रोज़मर्रा के जीवन के बीच ही खिलती है।
लेखक परिचय — आधुनिक मन का संवेदनशील आध्यात्मिक द्रष्टा
हितेश कुमार जोशी एक विचारशील, अंतर्मुखी और भावनात्मक रूप से गहरे लेखक हैं, जो आधुनिक जीवन की उलझनों में प्राचीन ज्ञान की सरलता और ठहराव खोजते हैं।
वे न किसी संप्रदाय से जुड़े हैं, न किसी कठोर वैचारिक धारा से बंधे।
उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे जटिल आध्यात्मिक प्रश्नों को अत्यंत सहज भाषा में प्रस्तुत करते हैं—ताकि पाठक न केवल समझ सके, बल्कि महसूस भी करे।
‘गीतायन’ उनके अपने अनुभवों, ध्यान, जीवन-संघर्षों और आत्ममंथन का सार है। यह पुस्तक उनके भीतर से उतरकर आई है—जैसे मौन ने स्वयं शब्द का रूप ले लिया हो।
लेखक का उद्देश्य किसी को बदलना नहीं, बल्कि उसे स्वयं से परिचित कराना है। उनकी दृष्टि में—
“जब मनुष्य स्वयं को समझ लेता है, संसार अपने आप बदलने लगता है।”
‘गीतायन’—गीता की आत्मा और आधुनिक जीवन का संगम
यद्यपि पुस्तक का शीर्षक “गीतायन” है और इसमें गीता के कई तत्व दिखाई देते हैं, परंतु यह गीता की कथा, सिद्धांत, कर्मकांड या धर्मग्रंथ नहीं है।
यह गीता की उस आत्मा को स्पर्श करती है जो हर मनुष्य के भीतर धड़कती है—उस चेतना को, जो समय, परिस्थिति, धर्म और परंपराओं से परे है।
पुस्तक यह समझाती है—
- कर्म का गूढ़ अर्थ
- भक्ति का आधुनिक स्वर
- ज्ञान की सहज व्याख्या
- संकट में छिपे अवसर
- समर्पण की शक्ति
- आत्म-साक्षात्कार का वास्तविक मार्ग
पुस्तक में उद्धृत कई प्रसंग, उदाहरण और संवाद पाठकों को ऐसा महसूस कराते हैं जैसे कृष्ण स्वयं उनके भीतर फुसफुसा रहे हों—
“डर मत, बस भीतर उतर।”
पुस्तक की भाषा—सूक्ष्म, सरल और अनुभूतिपूर्ण
गीतायन की भाषा न अत्यधिक दार्शनिक है, न ही भारी। यह साधारण पाठक के लिए उतनी ही उपयोगी है जितनी अध्यात्म का अध्ययन करने वाले के लिए।
- सरल वाक्य
- गहरे अर्थ
- सहज उदहारण
- और मौन में डूबा हुआ भाव
यही इस पुस्तक की सबसे बड़ी खूबसूरती है।
पाठक पढ़ते-पढ़ते कई बार रुक जाते हैं—क्योंकि कुछ पंक्तियाँ महसूस करने के लिए होती हैं, आगे बढ़ने के लिए नहीं।
क्यों पढ़ें गीतायन ?
आज की तेज रफ्तार जिंदगी में मनुष्य—
- बेचैन है
- खंडित है
- दबावों से घिरा है
- मानसिक रूप से थका है
- रिश्तों में उलझा है
- और स्वयं को खोता जा रहा है
ऐसे समय में गीतायन उस दीपक की तरह है जो अंधेरे को नहीं हटाता—बल्कि अंधेरे को समझना सिखाता है।
यह पुस्तक—
✓ आत्म-जागरूकता सिखाती है
✓ वर्तमान में जीना सिखाती है
✓ भय और उलझनें छोड़ना सिखाती है
✓ प्रेम की वास्तविकता समझाती है
✓ समर्पण की शक्ति दर्शाती है
✓ और अंततः मनुष्य को उसके भीतर के “कृष्ण” से जोड़ देती है
पाठकों की प्रतिक्रियाएँ (प्रारंभिक समीक्षा)
जिन पाठकों ने इसे पहले पढ़ा, उनका कहना है—
- “पुस्तक गीता को सरल अनुभव में बदल देती है।”
- “हर पंक्ति में शांति और गहराई है।”
- “यह कोई किताब नहीं—ध्यान है।”
- “इसने मुझे अपने भीतर लौटना सिखाया।”
- “मैं पहली बार किसी पुस्तक को पढ़ते हुए रोया भी, मुस्कुराया भी।”
प्रकाशन और उपलब्धता
गीतायन को Inksight Publishers ने प्रकाशित किया है, जो आधुनिक और प्रभावशाली साहित्य को आगे लाने के लिए जाना जाता है।
पुस्तक प्रमुख ऑनलाइन बुकस्टोर, प्रकाशक की वेबसाइट पर उपलब्ध है। Buy this on Amazon: Buy Link
निष्कर्ष — ‘गीतायन’ आपका अपना दर्पण है
यह पुस्तक न दूसरों को बदलने का आग्रह करती है, न किसी मत का प्रचार करती है।
यह बस इतना कहती है—
“जीवन बाहर नहीं बदलता—भीतर बदलता है।”
गीतायन उस आंतरिक यात्रा का आमंत्रण है जो हर मनुष्य के भीतर छोड़ी हुई है।
यह पुस्तक हर उम्र, हर विचारधारा और हर व्यक्ति के लिए है, जो अपने भीतर शांति, अर्थ और दिशा खोज रहा है।