“किशोरों के सपने और अभिभावकों कीजिम्मेदारी”

किशोरावस्था जीवन का वह चरण है जब बच्चा न पूरी तरह बच्चा रहता है और न ही पूर्ण वयस्क बनता है। यह संवेदनशील समय होता है, जिसमें उसकी सोच, व्यक्तित्व और भविष्य की दिशा तय होती है। इस उम्र में किशोर अनेक सपने देखते हैं जैसे कोई डॉक्टर बनना चाहता है, कोई खिलाड़ी, कोई कलाकार, तो कोई समाजसेवी। इन सपनों को साकार करने में परिवार, विशेषकर अभिभावकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।

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