कविता केवल शब्दों का विन्यास नहीं—वह मन की धड़कन, आत्मा की भाषा और अनकहे भावों की दस्तावेज़ होती है। अमित कोहली का नवीनतम कविता-संग्रह अक्स इसी संवेदना का विस्तार है। यह संग्रह प्रेम, विरह, प्रश्न और शून्य—इन सबकी उस यात्रा को दर्ज करता है, जिसे हर व्यक्ति अपने भीतर जीता है, पर अक्सर शब्दों में बाँध नहीं पाता। अक्स केवल कविताओं का संग्रह नहीं, यह मन की उन तहों का आईना है जहाँ भावनाएँ जमती हैं, पिघलती हैं, और कभी-कभी अपनी ही परछाइयों से संवाद करती हैं।