अरण्य आख्यान – जन गण वन एक ऐसा उपन्यास है जो पाठक को केवल कथा नहीं देता, बल्कि उसे एक असहज, जटिल और गहरे सामाजिक यथार्थ से साक्षात्कार कराता है। यह आदिवासी जीवन की उस परत को खोलता है, जिसे अक्सर मुख्यधारा या तो रोमांटिक बना देती है या पूरी तरह अनदेखा कर देती है। उपन्यास का केंद्र ‘जुरु’ है, लेकिन जुरु सिर्फ़ एक व्यक्ति नहीं—वह एक पूरी सामाजिक संरचना, एक मानसिक अवस्था और एक ऐतिहासिक अन्याय का प्रतिनिधि बनकर सामने आता है।