शीर्षक: वज़ीर–मोहरा
लेखक: अनिमेष अनंत
हिंदी साहित्य के चर्चित लेखक अनिमेष अनंत की नई कृति ‘वज़ीर–मोहरा’ का प्रकाशन पाठकों के लिए एक विशेष साहित्यिक उपहार है। यह उपन्यास प्रेम, विश्वास, छल, सत्ता और प्रतिशोध के जटिल ताने-बाने को बेहद प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है।
कहानी की शुरुआत अलंकृता नामक एक रहस्यमयी युवती से होती है, जिसकी उपस्थिति मात्र से वातावरण में एक अनकही खामोशी और आकर्षण भर जाता है। उसकी मुस्कान, उसके विचार और उसके व्यक्तित्व की गहराई पाठक को आरंभ से ही अपने साथ बाँध लेती है। लेकिन परिस्थितियों का ऐसा चक्र चलता है कि प्रेम और विश्वास की दुनिया से निकलकर वह एक ऐसे मार्ग पर पहुँच जाती है, जहाँ उसके भीतर का कोमल हृदय बर्फ की तरह ठंडा हो जाता है। इसके बाद शुरू होती है सत्ता, षड्यंत्र और प्रतिशोध की वह यात्रा, जो अनेक जिंदगियों की दिशा बदल देती है।
‘वज़ीर–मोहरा’ केवल एक कहानी नहीं, बल्कि राजनीति के उस अदृश्य खेल का चित्रण है, जहाँ हर व्यक्ति किसी न किसी चाल का हिस्सा होता है। लेखक ने राजनीति की बिसात पर चलने वाली रणनीतियों, महत्वाकांक्षाओं और मानवीय कमजोरियों को अत्यंत संवेदनशीलता और गहनता के साथ उकेरा है। उपन्यास यह प्रश्न भी उठाता है कि आखिर कौन वज़ीर है और कौन केवल एक मोहरा?
सशक्त कथानक, जीवंत पात्रों और रोमांचक घटनाक्रम से सुसज्जित यह पुस्तक पाठकों को अंत तक बाँधे रखने की क्षमता रखती है। अनिमेष अनंत की यह रचना समकालीन हिंदी कथा साहित्य में एक महत्वपूर्ण योगदान है, जो प्रेम, सत्ता और मानव मनोविज्ञान के अनेक आयामों को उजागर करती है।
‘वज़ीर–मोहरा’ उन पाठकों के लिए एक उत्कृष्ट कृति है, जो रहस्य, राजनीति, मनोवैज्ञानिक संघर्ष और मानवीय भावनाओं से परिपूर्ण साहित्य पढ़ना पसंद करते हैं।