“किशोरों के सपने और अभिभावकों कीजिम्मेदारी”

“किशोरों के सपने और अभिभावकों कीजिम्मेदारी”

Teenage Dreams and Parental Responsibility

(Where Dreams Find Direction – The Role of the Family)

(जहां सपनों को दिशा मिलती है – परिवार की भूमिका)   

Dr Megha Manish Sharma 

(Counselling psychologist) 

Assistant professor ( Dr APJ Abdul Kalam University Indore) 

किशोरावस्था जीवन का वह चरण है जब बच्चा न पूरी तरह बच्चा रहता है और न ही पूर्ण वयस्क बनता है। यह संवेदनशील समय होता है, जिसमें उसकी सोच, व्यक्तित्व और भविष्य की दिशा तय होती है। इस उम्र में किशोर अनेक सपने देखते हैं जैसे कोई डॉक्टर बनना चाहता है, कोई खिलाड़ी, कोई कलाकार, तो कोई समाजसेवी। इन सपनों को साकार करने में परिवार, विशेषकर अभिभावकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।

किशोरों के सपने केवल कल्पनाएँ नहीं होते, बल्कि उनकी क्षमताओं और रुचियों का प्रतिबिंब होते हैं। यदि इन्हें सही मार्गदर्शन मिले तो ये सपने जीवन की ठोस उपलब्धियों में बदल सकते हैं। अभिभावकों की जिम्मेदारी है कि वे बच्चों की रुचियों को समझें, उन्हें प्रोत्साहित करें और आत्मविश्वास जगाएँ। कई बार माता-पिता अपने अधूरे सपने बच्चों पर थोप देते हैं, जिससे उनमें हताशा और विद्रोह की भावना पैदा हो जाती है।

अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों के साथ संवाद स्थापित करें, उनकी समस्याएँ सुनें और उन्हें सही दिशा दिखाएँ। किशोरों को केवल अनुशासन की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि प्रेम, समझ और सहयोग की भी जरूरत होती है। यदि परिवार सकारात्मक वातावरण प्रदान करे तो किशोर अपने सपनों को साहस और मेहनत से पूरा कर सकते हैं।

 किशोरों के सपने ही उनके भविष्य की नींव होते हैं। अभिभावक यदि जिम्मेदारी से उन्हें सही मार्गदर्शन और सहयोग दें, तो वे न केवल अपने बच्चों का जीवन सफल बनाएँगे बल्कि समाज और राष्ट्र के विकास में भी योगदान करेंगे।

किशोरों के सपने और अभिभावकों की जिम्मेदारी

किशोरावस्था एक महत्वपूर्ण चरण है जिसमें बच्चे अपने सपनों और आकांक्षाओं को आकार देते हैं। इस चरण में, अभिभावकों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि वे अपने बच्चों को सही दिशा में मार्गदर्शन कर सकते हैं और उन्हें अपने सपनों को पूरा करने में मदद कर सकते हैं।

किशोरावस्था एक ऐसा समय होता है जब बच्चे अपने सपनों और लक्ष्यों को निर्धारित करने लगते हैं। यह समय उनके जीवन में एक महत्वपूर्ण मोड़ होता है, जब वे अपने भविष्य की दिशा तय करने लगते हैं। अभिभावकों की जिम्मेदारी होती है कि वे अपने बच्चों को इस समय में समर्थन और मार्गदर्शन प्रदान करें।

किशोरों के सपनों को समझना

किशोरों के सपने विभिन्न हो सकते हैं, जैसे कि –

– उच्च शिक्षा प्राप्त करना

– एक सफल करियर बनाना

– अपने परिवार का समर्थन करना

– समाज में योगदान देना

– अपने शौक को पूरा करना

अभिभावकों को अपने किशोर बच्चों के सपनों और लक्ष्यों को समझने का प्रयास करना चाहिए। उन्हें अपने बच्चों की रुचियों और प्रतिभाओं को पहचानना चाहिए और उन्हें अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करनी चाहिए।

अभिभावकों की जिम्मेदारी

अभिभावकों की जिम्मेदारी होती है कि वे अपने किशोर बच्चों को सही दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करें। उन्हें अपने बच्चों को अपने सपनों को प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए और उन्हें अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करनी चाहिए।

 इसके लिए –

  • अपने बच्चों की बात सुनें और उनकी आकांक्षाओं को समझें
  • उन्हें सही दिशा में मार्गदर्शन करें
  •  उन्हें शिक्षा और प्रशिक्षण के अवसर प्रदान करें
  •  उन्हें आत्म-विश्वास और आत्म-सम्मान दें
  •  उन्हें अपने निर्णय लेने की स्वतंत्रता दें

सपनों को प्राप्त करने में मदद

किशोर को बच्चों या वयस्कों की तुलना में ज्यादा बार और स्पष्ट सपने आते हैं। किशोरी के सपनों में आक्रामकता और हिंसा के विषय में आम है। किशोर के सपने अक्सर दोस्ती और रोमांस के उभरती इच्छाओं के इर्द-गिर्द घूमते हैं लोगों का अक्सर किशोरावस्था में ही सबसे ज्यादा आध्यात्मिक सपने आते हैं ।

अभिभावक किशोरी के सपनों को प्राप्त करने में मदद करने के लिए उनसे खुलकर बात कर सकते हैं, उनकी शक्तियों और रुचियां को पहचानने में उनका मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं, और उन्हें व्यावहारिक लक्ष्य निर्धारित करने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं। वह उन्हें विभिन्न करियर विकल्पों का पता लगाने में मदद कर सकते हैं और आदर्श और सलाहकारों से बातचीत कर सकते हैं और उनका समर्थन करने वाले लेकिन साथ ही उन्हें स्वतंत्रता और जिम्मेदारी के साथ सहायक वातावरण का निर्माण करने और उसे पर कार्य करने में मदद कर सकते हैं।

अभिभावक अपने किशोर बच्चों को उनके सपनों को प्राप्त करने में मदद करने के सबसे पहले अपने लक्ष्य को स्पष्ट रूप से परिभाषित करें और एक यथार्थवादी कार्य योजना बनाएं। लगातार कड़ी मेहनत करें, अनुशासित रहे और अपने लक्ष्यों की ओर छोटे-छोटे कदम बढ़ाएं। इसके साथही, सकारात्मक सोच रखें, खुद को प्रेरित करते रहें और असफलता से घबराएं नहीं, बल्कि उसे एक सबक के तौर पर ले।

सभी माता-पिता  का कर्तव्य है कि बच्चों को एक सभ्य नागरिक बनाने का प्रयास करें उन्हें अनुशासन प्रेम एवं वात्सल्य का ज्ञान दें। बच्चे माता-पिता के दिए हुए गुणों को प्राप्त कर अच्छे  इंसान बन पाते हैं अर्थात में इनकी (अभिभावक)भूमिका बच्चों को हितैषी सलाहकार और मार्गदर्शक की होती है।

निष्कर्ष

किशोरों के सपने और अभिभावकों की जिम्मेदारी एक महत्वपूर्ण विषय है। अभिभावकों को अपने किशोर बच्चों के सपनों और लक्ष्यों को समझने का प्रयास करना चाहिए और उन्हें अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करनी चाहिए। अभिभावकों की जिम्मेदारी होती है कि वे अपने किशोर बच्चों को सही दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करें और उन्हें अपने सपनों को प्राप्त करने में मदद करें।

किशोरों के सपने और अभिभावकों की जिम्मेदारी एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। अभिभावकों को अपने बच्चों की आकांक्षाओं को समझने और उन्हें सही दिशा में मार्गदर्शन करने की आवश्यकता है। इससे किशोर अपने सपनों को पूरा कर सकते हैं और एक सफल और सुखी जीवन जी सकते हैं।

     “किशोर के सपने, अभिभावकों के प्रयास,

      मिलकर बनाएंगे एक बेहतर कल आज।

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