Book Release: सर्प दंश by गिरीश चौधरी

Book Release: सर्प दंश by गिरीश चौधरी

कोविड महामारी जैसे कठिन और भयावह दौर की पृष्ठभूमि में जन्मी प्रेम, साहस और मानवीय संवेदनाओं से भरपूर कहानी ‘सर्प दंश’ पाठकों को रिश्तों और भावनाओं की एक गहरी यात्रा पर ले जाती है। लेखक गिरीश चौधरी ने इस उपन्यास के माध्यम से महामारी के संकट के बीच पनपने वाले प्रेम, जिम्मेदारी और मानवीय करुणा को बेहद संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया है।

‘सर्प दंश’ की कहानी आर्यन और उसके मित्र अरविन्द के इर्द-गिर्द घूमती है। अरविन्द को हर बात में शर्त लगाने और किसी भी कीमत पर उसे जीतने की आदत है। इसी क्रम में वह शिमला के एक गेस्ट हाउस के केयरटेकर की बेटी तारा से झूठे प्रेम का नाटक करने की शर्त आर्यन के सामने रखता है। आर्यन यह शर्त जीत तो जाता है, लेकिन यही जीत आगे चलकर उसके जीवन की सबसे बड़ी हार और सबसे गहरे भावनात्मक अनुभव में बदल जाती है।

कहानी में परिस्थितियाँ तब अचानक बदल जाती हैं, जब कोविड महामारी का प्रकोप पहाड़ों तक पहुँचता है। भय और असुरक्षा के बीच अरविन्द वहाँ से निकल जाता है, जबकि गेस्ट हाउस का केयरटेकर और उसकी बेटी तारा महामारी की चपेट में आ जाते हैं। ऐसे कठिन समय में आर्यन अपने डर पर काबू रखते हुए तारा और उसके पिता की देखभाल करने का निर्णय लेता है। वह पूरी निष्ठा और साहस के साथ उनका साथ निभाता है, लेकिन तारा के पिता को बचा नहीं पाता। इस घटना के बाद आर्यन और तारा के बीच का रिश्ता एक नए भावनात्मक आयाम में प्रवेश करता है।

महामारी, एकांत, भय और अनिश्चितता के बीच आर्यन और तारा का प्रेम धीरे-धीरे गहराता है। यह प्रेम केवल आकर्षण तक सीमित नहीं रहता, बल्कि कठिन परिस्थितियों में एक-दूसरे के प्रति विश्वास, संवेदना और जिम्मेदारी के रूप में विकसित होता है। ‘सर्प दंश’ इसी मानवीय रिश्ते की कहानी है, जहाँ परिस्थितियाँ प्रेम की परीक्षा लेती हैं और एक छोटी-सी शर्त जीवन के सबसे महत्वपूर्ण फैसले में बदल जाती है।

इस उपन्यास की विशेषता इसकी पृष्ठभूमि भी है। कोविड महामारी ने पूरी दुनिया को जिस भय, अकेलेपन और असहायता का अनुभव कराया, उसे लेखक ने एक प्रेम कथा के माध्यम से कहानी का हिस्सा बनाया है। महामारी के दौरान बदलते सामाजिक और व्यक्तिगत संबंधों के साथ-साथ यह रचना यह भी दिखाती है कि संकट की घड़ी में इंसान का वास्तविक चरित्र और उसकी संवेदनशीलता किस तरह सामने आती है।

‘सर्प दंश’ के लेखक गिरीश चौधरी पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं और उत्तर बिहार के मिथिला क्षेत्र के दरभंगा निवासी हैं। व्यावसायिक जीवन की व्यस्तताओं के बीच लेखन का उनका शौक कहीं पीछे छूट गया था। कोविड महामारी के दौरान जब पूरा देश अपने-अपने घरों में सीमित था, तब उन्हें इस कहानी को लिखने का अवसर मिला। हालांकि महामारी समाप्त होने तक यह रचना आधी-अधूरी अवस्था में उनके लैपटॉप में ही रह गई। लंबे समय बाद उनकी पत्नी ने इस रचना की ओर उनका ध्यान आकर्षित किया, जिसके बाद उन्होंने इसे फिर से उठाया और अंतिम रूप दिया।

‘सर्प दंश’ गिरीश चौधरी की पहली रचना है। एक पेशेवर जीवन की व्यस्तता से निकलकर साहित्य की दुनिया में उनका यह पहला कदम पाठकों के लिए एक संवेदनशील और भावनात्मक प्रेम कथा लेकर आया है। उम्मीद है कि आर्यन और तारा की यह कहानी पाठकों को न केवल प्रेम की गहराई का एहसास कराएगी, बल्कि कठिन समय में मानवीय साहस, करुणा और साथ निभाने के महत्व से भी रूबरू कराएगी। यह उपन्यास निश्चित रूप से उन पाठकों के दिलों को छूने का प्रयास है, जो प्रेम के साथ-साथ जीवन की वास्तविक संवेदनाओं को भी महसूस करना चाहते हैं।

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