‘छत्तीसगढ़ में राम वन गमन पथ एवं प्रवास’ नीता बैनर्जी एवं डॉ. रामरतन साहू द्वारा रचित एक शोधपरक एवं ऐतिहासिक कृति है, जो भगवान श्रीराम के वनवास काल से जुड़े छत्तीसगढ़ के विभिन्न स्थलों, मार्गों, लोक-परंपराओं और सांस्कृतिक संदर्भों का विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत करती है। यह पुस्तक रामायण के संदर्भों, ऐतिहासिक साक्ष्यों, स्थानीय मान्यताओं, पुरातात्त्विक संकेतों तथा क्षेत्रीय सांस्कृतिक परंपराओं के आधार पर छत्तीसगढ़ में श्रीराम के प्रवास से संबंधित महत्वपूर्ण स्थलों को समझने का गंभीर प्रयास करती है। इसमें राम वन गमन पथ से जुड़े धार्मिक, ऐतिहासिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक पहलुओं को तथ्यपरक और शोधोन्मुख दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक के माध्यम से छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोकविश्वास और रामायण परंपरा के बीच स्थापित गहरे संबंधों को समझने का अवसर मिलता है। यह कृति न केवल धार्मिक आस्था से जुड़े महत्वपूर्ण स्थलों की जानकारी प्रदान करती है, बल्कि क्षेत्र के इतिहास, संस्कृति और सभ्यतागत विकास को भी एक व्यापक दृष्टिकोण से देखने का प्रयास करती है। शोधार्थियों, इतिहास एवं संस्कृति के विद्यार्थियों तथा भारतीय सभ्यता और रामायण परंपरा में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए यह पुस्तक एक उपयोगी और ज्ञानवर्धक संदर्भ सामग्री के रूप में महत्वपूर्ण है।
पुस्तक की सह-लेखिका डॉ. नीता बनर्जी अंग्रेजी एवं इतिहास में स्नातकोत्तर तथा इतिहास विषय में पीएच.डी. हैं और लगभग 36 वर्षों से शिक्षा के क्षेत्र से जुड़ी रही हैं। उन्होंने विभिन्न शासकीय विद्यालयों में व्याख्याता एवं प्राचार्य के रूप में सेवाएँ प्रदान की हैं। 19 वर्षों के प्राचार्य कार्यकाल के दौरान उन्होंने शैक्षणिक गुणवत्ता, अनुशासन और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को विशेष प्राथमिकता दी। अपने शोधकार्य में उन्हें डॉ. रामरतन साहू का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ, जिसके सहयोग से उन्होंने डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की। उनके मार्गदर्शन में 12वीं के 36 बैच उत्तीर्ण हुए और विद्यालयों का परीक्षा परिणाम निरंतर 95 प्रतिशत से अधिक रहा। पर्यावरण संरक्षण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का परिचय इस बात से मिलता है कि उन्होंने विद्यालयों में 500 से अधिक पेड़-पौधे लगवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके अतिरिक्त, उनके शोध-पत्र राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय जर्नल्स में प्रकाशित हुए हैं तथा उन्होंने विभिन्न शोध सम्मेलनों में सक्रिय सहभागिता की है। उनके अनेक विद्यार्थी आज देश-विदेश में उच्च पदों पर कार्यरत हैं। विद्यार्थियों, सहकर्मियों और ग्रामीण समुदाय से प्राप्त स्नेह एवं सम्मान को वे अपनी सबसे बड़ी उपलब्धियों में मानती हैं।
पुस्तक के सह-लेखक डॉ. रामरतन साहू इतिहास विषय के अनुभवी शिक्षाविद् एवं शोधकर्ता हैं। एम.ए., एम.फिल. एवं पीएच.डी. जैसी शैक्षणिक योग्यताओं से संपन्न डॉ. साहू को महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में अध्यापन का लगभग 20 वर्षों का अनुभव है। अनुसंधान के क्षेत्र में उनकी विशेष रुचि छत्तीसगढ़ के ऐतिहासिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक विषयों में रही है। उनके निर्देशन में 11 शोधार्थियों ने पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की है तथा उनकी 12 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। वे महाकौशल इतिहास परिषद, छत्तीसगढ़ के आजीवन सदस्य हैं और कौंसिल फॉर टीचर एजुकेशन फाउंडेशन, सी.जी. चैप्टर के भी आजीवन सदस्य हैं। उनके 50 से अधिक शोध-पत्र राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय जर्नल्स तथा यूजीसी-केयर जर्नल्स में प्रकाशित हो चुके हैं। उन्होंने अनेक राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय शोध सम्मेलनों और संगोष्ठियों में शोध-पत्र प्रस्तुत किए हैं तथा सक्रिय सहभागिता निभाई है। उनके अकादमिक योगदान को विभिन्न सम्मानों से भी मान्यता मिली है, जिनमें ग्लोबल अवार्ड 2020 और बेस्ट फैकल्टी अवार्ड 2022 प्रमुख हैं। वर्तमान में वे डॉ. सी. वी. रामन विश्वविद्यालय, करगीरोड, कोटा, बिलासपुर (छत्तीसगढ़) के सामाजिक विज्ञान विभाग (इतिहास) में एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं।
‘छत्तीसगढ़ में राम वन गमन पथ एवं प्रवास’ अपनी विषयवस्तु, शोधपरक दृष्टिकोण और सांस्कृतिक संदर्भों के कारण छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक एवं धार्मिक विरासत को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। यह पुस्तक पाठकों को रामायण परंपरा से जुड़े स्थलों और मान्यताओं से परिचित कराने के साथ-साथ इतिहास, संस्कृति, लोकविश्वास और शोध के अंतर्संबंधों को समझने का अवसर प्रदान करती है। लेखकों का दीर्घ शैक्षणिक अनुभव और शोधपरक दृष्टिकोण इस कृति को गंभीर पाठकों, शोधार्थियों और भारतीय सांस्कृतिक इतिहास में रुचि रखने वाले सभी पाठकों के लिए विशेष रूप से उपयोगी बनाता है।