“संदेश” अननमेष अनंत का एक ऐसा उपन्यास है जो पाठक को मनोवैज्ञानिक गहराइयों, रहस्य, पौराणिक प्रतीकों और जीवन–मरण के प्रश्नों से भरपूर एक असाधारण यात्रा पर ले जाता है। कहानी की नायिका अन्विता, जिसकी जिंदगी कई वर्षों से टूटन, हिंसा, मानसिक शोषण और दर्द के बीच कैद रही है, इस उपन्यास की धुरी है। किताब की शुरुआत ही एक बेहद मार्मिक दृश्य से होती है—अन्विता गोवा के एक शांत, निजी बीच पर पहुँची है, क्योंकि वह अपनी ज़िंदगी खत्म करने का निर्णय ले चुकी है। इस भावनात्मक बोझ, टूटे आत्मविश्वास और जीवन से भागने की मानसिकता को लेखक ने अत्यंत सजीवता से उकेरा है ।
