शीर्षक: रासो रामायण
लेखक: डॉ. प्रदीप पाण्डेय ‘हरिश्वती’
भारतीय साहित्य और संस्कृति के लिए यह अत्यंत गौरव का विषय है कि सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. प्रदीप पाण्डेय ‘हरिश्वती’ द्वारा रचित महाकाव्य “रासो रामायण” का प्रकाशन हुआ है। यह कृति रामायण पर आधारित विश्व का पहला रासो महाकाव्य मानी जा रही है, जो हिंदी साहित्य की प्राचीन रासो परंपरा को पुनर्जीवित करने का एक ऐतिहासिक प्रयास है।
लगभग 1640 छंदों में रचित यह महाकाव्य भगवान श्रीराम के जीवन, आदर्शों, संघर्षों, मर्यादाओं और लोककल्याणकारी व्यक्तित्व का विस्तृत एवं गेय वर्णन प्रस्तुत करता है। लेखक ने बालकांड से लेकर लंका विजय, रामराज्य, सीता वनवास तथा लव-कुश प्रसंग तक सम्पूर्ण रामकथा को रासो शैली में अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है।
साहित्य जगत के अनेक विद्वानों ने इस कृति को ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है। उनके अनुसार लगभग चार सौ वर्षों से विलुप्त होती जा रही रासो परंपरा को पुनः प्रतिष्ठित करने का यह अद्भुत प्रयास हिंदी साहित्य के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगा।
रासो रामायण केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों, कर्तव्यनिष्ठा और मानवीय आदर्शों का जीवंत दस्तावेज है। इसकी सरल भाषा, गेयता, छंदबद्धता और भावप्रवण प्रस्तुति पाठकों को आरंभ से अंत तक बांधे रखती है।
यह महाकाव्य उन पाठकों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जो रामकथा को एक नवीन साहित्यिक स्वरूप में पढ़ना चाहते हैं। निस्संदेह, रासो रामायण भारतीय साहित्य की अमूल्य धरोहर के रूप में आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।
साहित्य प्रेमियों, शोधार्थियों एवं रामकथा के पाठकों के लिए यह पुस्तक एक संग्रहणीय और पठनीय कृति है।